काजल की कुंवारी चूत, मेरी चचेरी बहन

पाठकों, मेरा नाम रोहन वर्मा है। उम्र छब्बीस साल। इंदौर में रहता हूँ, एक प्राइवेट फर्म में अकाउंटेंट हूँ। कद पाँच फुट ग्यारह इंच। शरीर साधारण है, पेट थोड़ा सा है बैठे-बैठे काम की वजह से। लंड साढ़े सात इंच का है, मोटाई ठीक-ठाक। ये बात आज तक परिवार में किसी को नहीं बताई। लिख रहा हूँ क्योंकि वो दोपहर अब भी कभी कभी याद आती है — बाथरूम की दरार, सोफे का खून, और काजल की वो पहली सिसकारी।

मेरी चचेरी बहन का नाम काजल वर्मा है। चाचा जी की बड़ी बेटी। उम्र इक्कीस साल, कॉलेज फाइनल ईयर। कद छोटा — पाँच फुट एक इंच। रंग गोरा। चेहरा गोल, आँखें बड़ी काली, होंठ मोटे और हमेशा थोड़े खुले से। स्तन उम्र से भारी हैं। सूट पहनती है तो कुरती के बटनों पर जोर पड़ता है, छत्तीस के आसपास लगते हैं। कमर पतली, गांड गोल और पीछे को निकली हुई। 

बचपन में हम एक साथ होली खेलते थे, छुट्टियों में हर साल दो-तीन हफ्ते चाचा जी के उदयपुर वाले घर में बीतते थे। मैं उसको छोटी ही समझता रहा जब तक पिछले साल एक शादी में उसके लाल सूट ने वो भ्रम तोड़ नहीं दिया।

कुरती इतनी कसी थी कि स्तनों का गोल आकार साफ दिख रहा था, और जब वो बैठी तो गांड कुशन पर फैल गई। उस रात मैंने मुट्ठी मारी इस सोच के साथ कि ये मेरी बहन है, ऐसा सोचना पाप है। पर पाप अगले मार्च तक नहीं रुका।

ये घटना पिछले साल मार्च की है। उदयपुर में एक रिश्तेदार की सगाई थी। सुबह ही पूरा काफिला निकल गया — मेरे मम्मी-पापा, चाचा-चाची, काजल की सत्रह साल छोटी बहन भी साथ थी। काजल को रात को हल्का बुखार रहा था इसलिए चाची ने उसको घर पर छोड़ दिया। निकलते समय चाची ने मुझे अलग से कहा, “रोहन बेटा, तू दोपहर को खाना लेकर घर चले जाइयो। काजल अकेली है, दवा भी पिला दीजियो। हम लोग शाम तक लौटेंगे।” मैंने हाँ कहा। सच ये था कि मुझे भी रिश्ते-नाते वाली भीड़ अच्छी नहीं लग रही थी।

दोपहर एक बजकर दस मिनट पर मैं चाचा जी के पुराने मकान पहुँचा। मुख्य गेट का ताला खुला था। अंदर आवाज दी तो जवाब नहीं आया। खाने का थैला किचन के स्लैब पर रखा। घर शांत था, बस बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आ रही थी। बाथरूम पुराने ढंग का है — लकड़ी का दरवाजा, कुंडी अंदर से, ऊपर की तरफ सालों पुरानी एक दरार जहाँ से लकड़ी सूखकर हटी हुई है। बचपन में हम उसी दरार से एक-दूसरे को डराया करते थे। मैंने सोचा काजल नहा रही होगी, सोफे पर बैठकर इंतजार करूँ।

फिर वो आवाज आई जो नल के पानी की नहीं थी। एक लंबी, दबी हुई साँस। फिर धीमी सिसकारी, जैसे कोई दर्द में हो या मजे में। मैं उठा। दरार के पास गया। अंदर का दृश्य देखकर साँस रुक गई।

काजल टब के किनारे बैठी थी, पूरी नंगी। एक पैर टब की मुंडेर पर, दूसरा फर्श पर टिका। दाहिने हाथ की दो उंगलियाँ अपनी चूत पर घूम रही थीं — कभी लिपें खोलतीं, कभी क्लिट पर गोल घुमातीं, कभी एक उंगली अंदर ले जाकर धीमे निकालतीं। बायाँ हाथ एक स्तन को जोर से दबा रहा था, निप्पल उंगली-अंगूठे के बीच मरा हुआ। आँखें बंद, होंठ खुले, गर्दन पीछे की तरफ। नहाने का पानी उसके कंधों से नीचे बह रहा था, जांघों को चमकदार बनाए हुए। चूत की लिपें गुलाबी थीं, बीच से गीली चमक आ रही थी। उसके चेहरे पर वो भाव थे जो मैंने कभी परिवार में किसी लड़की पर नहीं देखे थे। एक बार उसके मुँह से निकला, बहुत धीमे, “आह… और अंदर…”

मेरा लंड एक झटके में पैंट के अंदर तन गया, दर्द होने लगा। मैंने ऊपर से हाथ रखकर दबाया। दिमाग कह रहा था ये चचेरी बहन है, यहाँ से हट जा। शरीर नहीं हटा। पाँच-सात मिनट मैं खड़ा रहा। काजल खुद से खेलती रही, साँसें तेज होती रहीं, जांघें काँपने लगीं। फिर अचानक रुकी जैसे किसी ने पुकारा हो। आँखें खोलीं, इधर-उधर देखा, जल्दी से खड़ी हुई और नहाने लगी — स्पंज से बदन रगड़ा, बाल में शैंपू लगाया, जैसे वो काम हुआ ही न हो। मैं पीछे हटकर सोफे पर बैठ गया। हाथ काँप रहे थे। लंड अभी भी खड़ा था।

पंद्रह मिनट बाद काजल तौलिया लपेटे बाहर आई। बाल खुले और भीगे, तौलिया छाती पर कसकर था लेकिन जांघें आधी बाहर थीं। मुझे सोफे पर देखकर वो चौंक गई, तौलिया और कस लिया। “भैया? आप? सब लोग तो सगाई में…” आवाज में घबराहट थी। मैंने थैला दिखाया, आवाज सामान्य रखने की कोशिश की, “चाची ने खाना भेजा है। तबीयत कैसी है? दवा पी ली?” काजल के गाल लाल थे, शायद नहाने की भाप से, शायद किसी और वजह से। “अब बुखार नहीं है। मैं कपड़े पहन लूँ।” अपने कमरे की तरफ चली गई। मैं किचन में प्लेट निकालने का नाटक करने लगा। दिमाग में वही नंगी तस्वीर घूम रही थी।

वो सफेद पतला टॉप और काली लोअर पहनकर आई। बाल अभी भी गीले, टॉप के अंदर लाल ब्रा की लेस साफ झलक रही थी। निप्पल के उभार टॉप से दिख रहे थे। मैंने कहा, “बाल ऐसे ही छोड़ दिए तो सर्दी लग जाएगी। तौलिया दे, मैं झाड़ दूँ।” काजल हँसी, वो पुरानी हँसी जिसमें वो मुझे भैया कहती है, “मैं खुद कर लूँगी भैया, तुम खाना निकालो।” फिर भी तौलिया मेरे हाथ में थमा दिया। मैं उसके पीछे खड़ा हो गया। बाल लंबे हैं, कमर तक। तौलिया से झाड़ते-झाड़ते बाल उसके स्तनों के ऊपर गिरे। मैंने जानबूझकर बाल वहीं इकट्ठा किए और तौलिया दबाने के बहाने हाथ स्तन के ऊपरी गोल हिस्से पर ले गया। काजल की कमर सख्त हो गई लेकिन वो हटी नहीं। दूसरी बार मैंने और साफ दबाया — पूरी हथेली स्तन पर।

काजल बहुत धीमे बोली, बिना मुड़े, “भैया… ये क्या कर रहे हो…” मैं उसके कान के पास गया, तौलिया नीचे किया, दोनों हाथ उसके कमर पर रखे। “तुझे नहाते हुए देखा मैंने। दरवाजे की दरार से। तू खुद कुछ कर रही थी। 

ये सुन के उसके कंधे काँपे। मुँह खुला और आँखें बड़ी हो गई। भागने की कोशिश नहीं की। मैंने दाहिना हाथ आगे बढ़ाकर टॉप के ऊपर से पूरा स्तन पकड़ लिया। काजल की साँस एकदम तेज हो गई। नजरें नीचे फर्श पर थीं। लेकिन मुझे रोकने की कोशिश नहीं की।

मैंने उसको घुमाया, दीवार की तरफ पीठ कर दी। दोनों स्तन एक साथ दबाने लगा, निप्पल उंगली से मरोड़े। काजल की आँखें बंद हो गईं, सिर दीवार से लगा। मैंने पेट पर हाथ फिराया, नाभि के नीचे तक गया, लोअर की इलास्टिक में उंगली डाली। काजल ने मेरा हाथ पकड़ा — हटाने के लिए नहीं। 

अपनी हथेली मेरे हाथ के ऊपर रखी और नीचे की तरफ धकेल दिया। पैंटी के अंदर उंगली चली गई। चूत गर्म थी, लिपें गीली थीं। मैंने दो उंगलियों से लिपें खोलीं, बीच की नमी पर घुमाया, क्लिट पर गोलाई से दबाया। काजल की कमर काँप गई, एक लंबी सिसकी निकली जो उसने मुँह दबाकर रोक ली।

मैंने उसका मुँह चूमने लगा। पहले तो उसने होंठ बंद कर ली, लेकिन मेरे किस करने की वजह से शायद उसको भी अछा लगने लगा तो उसने अपना मुँह खोल दिया। मैंने अपनी जीभ अन्दर डाल दी। काजल भी जवाब देने लगी।

मैंने उसका दाहिना हाथ पकड़कर अपनी पैंट के उभार पर रखा। लंड के ऊपर से कपड़े सहित उसने मुट्ठी बाँधी तो उंगलियाँ सिकुड़ गईं। फुसफुसाई, “भैया… ये गलत है…”

मैंने उसकी परवाह किए बगैर जिप खोली, पैंट और अंडरवियर नीचे सरका दिया। लंड बाहर निकल आया, पूरा खड़ा था, घुसने के लिए।

उसकी नजर मेरे लंड पर गई, और उसको देख रही थी। फिर वो मेरी तरफ देखी, और देखते ही शर्मा गई। 

मैंने उसका हाथ पकडा और अपने लंड पे रख दिया। 

उसने हाथ नहीं हटाया उसकी सांसे तेज हो गई, और हाथ जैसे कांप रहे थे। मैंने अपने हाथ से उसका हाथ पकडा और लंड को सहलाने लगा। वो अब मेरे लंड को सहला रही थी। 

हम दोनों गरम हो गए थे तो मैं उसको नीचे घुटनों पे बैठाया, और बोला “मुँह में लो।”

उसका चेहरा पूरा लाल हो गया, वो मुझे देख रही थी उसकी आंखे जैसे कुछ कह रही थी। मैंने उसका बाल सहलाया। उसके दोनों हाथ मेरे कुंड को सहला रहे थे। 

मैंने बाल सहलाते हुए फिर से कहा, “मुँह में ले काजल।” वो झिझकी गई इस बार, “भैया मैंने कभी किसी का… देखा भी नहीं इतना पास से, तो मुँह में कैसे लूँ।” 

मैंने सिर हल्के से उसका आगे किया, जोर नहीं लगाया। काजल ने जीभ निकाली उसकी आंखे बंद हो गई, सुपाड़े के छेद पर फेरी, फिर होंठों से घेरा और मुँह में सिर ले लिया। मैं हिल गया उसके  दाँत लगे, वो चूसने लगी — उसकी साँसे लंड पे महसूस हो रही थी।

लंड पर उसकी लार की तार लटकने लगी। मैंने सिर के पीछे हाथ रखा और आगे पीछे करने लगा। वो भी मजे से पूरा अंदर लेकर चूस रही थी। गल-गल आवाज़े गूँजने लगी थी।

जैसे लगा मेरा अभी निकल जाएगा तो मैंने उसको ऊपर उठाया। टॉप सिर से निकाल कर, ब्रा का हुक एक हाथ से खोल दिया। स्तन बाहर आए — उसकी आंखे बंद थी। 

मुँह उसके पास लेकर गया और  जोर से चूसा, जीभ निप्पल पर घुमाई, हल्के दाँत से काटा। काजल का सिर पीछे हो गया, वो दीवाल से जा लगी, “आह भैया… अच्छा लग रहा है, जोर से चूसो… वही करो जो मैं खुद करती हूँ…जोर से” 

मैंने दूसरा हाट उसके दूसरे स्तन पे रखा और दबाने लगा। 

उसने मेरा सर पे हाथ रखा और अपने छाती पे दबाने लगी, “आह भैया बहुत अच्छे चूस रहे हो, तो मैं पागल हो रही हूँ और जोर से चुसो।”

काजल को सोफे पर लेटा दी। उसने टाँगें मिलाने की कोशिश की, मैंने हाथों से उसके घुटनों को अलग कर दिया। उसकी चूत मेरे सामने आ गई। बीच से पानी की एक लकीर नीचे गिर रही थी। 

मैंने मुँह लगाया और पानी चाट ली। हल्की सी खट्टी-मीठी का स्वाद लगा। ऊपर से नीचे फिर से एक चाट मारी। उसकी कमर उछल पडी। उसके हाथ मेरे सर पर आ गए, और मुँह से सिसकी निकली, “आह्ह्ह…”

मैं उसकी चूत को अच्छे से चाटने लगा। जीभ अंदर डाल देता जब उसकी क्लिट को अपने होंठों में लेकर चूसा, उसने अपने हाथ से मेरे सिर को इतना तेज नीचे दबाया कि जैसे लगा वो मेरा सिर अपनी चूत में डाल लेगी। “आह्ह्ह… चूसो ऐसे ही आह्ह्ह…”

मैं और तेज अंदर जीभ घुमाने लगा और अंदर डालने की कोशिश की। काजल के दोनों हाथ मेरे बालों में तेज तेज घूम रहे थे। “वहाँ मत हटना भैया… वहीं… अहह्ह…” मैंने समय नहीं देखा। चाटता रहा जब तक उसकी जांघें मेरे कानों से नहीं टकराईं और चूत से पानी मेरी ठुड्डी और होठों तक नहीं आ गया। काजल एक बार पूरे बदन से काँपी, कमर उठा दी, और चीखते हुए गिर गई, “आह्ह्ह…”

“अब अंदर डाल दो भैया, आह्ह… अब अपना बना लो।”

उसने हाँफते हुए कहा।

मैं उठा लंड उसके चूत के मुँह पर रखा। सुपाड़ा अंदर डालने की कोशिश की तो काजल बोली, आँखें आधी खुली, “गर्म है भैया… बहुत गर्म…लग रहा है। अंदर कैसे जाएगा इतना मोटा…” मैंने धीरे से दबाव दिया। सुपाड़ा अंदर अटक गया, “आह्ह भैया आराम से दर्द हो रहा है।”

थोड़ी से उसकी चूत अपने दोनों हाथों से खोला। और फिर एक नियंत्रित धक्का मारा फ़क — आधा लंड अंदर घुस गया। काजल चिल्लाई, नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए, आवाज घर में गूँज गई, “दर्द हो रहा है… निकाल दो भैया… बहुत दर्द… अहह नहीं…निकाल दो प्लीज…” 

मैं अंदर वैसे ही रुक गया, हिला भी नहीं। उसके माथे और होंठों की चूमने लगा। “थोड़ा सह ले काजल। पहली बार सबको होता है। अगर कहेगी तो अभी निकल जाऊँगा।” 

वो रो रही थी, आँसू कनपटी तक। मैं वैसे ही खड़ा था। उसके दोनों हाथ मेरी पीठ को अंदर की तरफ दबाने लगे।

मैंने अपना होंठ उसके होठों पे रखा और चूसने लगा। और अपनी साँस रोके दूसरा धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। उसने मेरे होठों को काट दिया जोर से मेरे मुंह से भी चीख निकल गई, “आह्ह्ह…”

मैं वैसे ही अंदर डाल के उसे चूम रहा था और उसके स्तन हल्के हल्के दबा रहा था।, उसके आंखों से पानी गिर रहा था। नीचे गर्म गीलापन महसूस हो रहा था। कम से कम पांच मिनट बाद उसने आंखे खोली और मुझे देखा, मैने कमर अपनी धीर धीरे हिलाना शुरू कर दिया। अब वो मुझे देख रही थी मेरी आंखों में और मुझ से चूद रही थी।

जब उसकी नजर नीचे गई और चूत पे तो वो थोड़ा डर गई। वो बोली, “खून निकल रहा है।” उसकी आवाज काँप रही थी।

“ये कुंवारी लड़की का खून है काजल। तो डरने की बात नहीं।” और उसके बालों को सहलाया,  उसकी कमर हल्की-हल्की उठने लगी मेरे धक्के का जवाब देने लगी। “अब… अब अच्छा लग रहा है भैया… ऐसे ही… मत निकालना अब…ऐसे ही करो”

मैंने गति बढ़ा दी। थक थक कि आवाजें गूंजने लगी। हर धक्के से उसकी सिसकी निकलती। टुकड़ों में, साँस तोड़-तोड़कर, “चोदो भैया… अहह… फाड़ दो आज… औरत बना दो मुझे… जोर से अब चोदो…” 

मैंने टाँगें उसके कंधों के पास मोड़ीं, और गहरा धक्के मारने लगा। उसकी पूरा शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, “आह्ह… भैया बहुत अच्छा लग रहा है…आह्ह…” 

बीस मिनट के करीब ये सब चला। और मेरा भी निकलने लगा था। सोचा अंदर ही छोड़ दूँ फिर सोचा अंदर छोड़ दिया तो जोखिम होगा। इस लिए उसके चूत के ऊपर ही छोड़ दिया। “आह्ह्ह… काजल” बोलते हुए उसके ऊपर ही लेट गया। हम दोनों की सांसे बहुत तेज चल रही थी।

कुछ देर बाद हम उठे और दोनों बाथरूम गए क्योंकि सोफे और शरीर दोनों पर खून लगा रहा। नल खोला। काजल ने मेरे लंड को अपने हाथ से साबुन लगाया, और धो का साफ किया। उसके धोने से सहलाने की वजह से फिर से खड़ा हो गया था। वो भी समझ गई थे अब आगे क्या होगा। वो मेरी तरफ देख के हंसी और मेरे लंड को मारते हुए बोली, “ये फिर से खड़ा हो गया।”

मैने उसको ऊपर उठाया और बोला, “तो फिर से करें” उसने सिर हिलाया, “हां”

हम शॉवर के नीचे थे ऊपर से पानी गिर रहा था। फिर दीवार से लगाया, एक टाँग अपनी कमर पर चढ़ाई और चूत में फिर डाल दिया। इस बार लंड आसानी से घुस गया — वो मेरे होंठों को चूसने लगी, खड़े-खड़े धक्के मारने लगा, पानी दोनों के ऊपर गिर रहा था। काजल के स्तन मेरे सीने से रगड़ रहे थे, मैने एक निप्पल्स को मुंह में लिया और चूसने लगा दूसरे को दबा रहा था। वो मुझे अपनी बाहों में दबोचे हुए थी। और कमर हिला रही थी, “आह्ह्ह…आह्ह…” की आवाजे गूंज रही थी। 

हम दोनों एक दूसरे को कस को दबोचे और दोनों एक दूसरे को धक्के मार रहे थे और अचानक दोनों रुक गए दोनों की सांसे एक दूसरे को पागल बना रही थी हम दोनों एक साथ ही झड़ गए। फिर हमने एक दूसरे को साफ किया और नहा कर बाहर आ गए। और कपड़े पहने लिए।

वो मुझे देखते हुए बोली बिना आँख मिलाए, “भैया… ये बात… किसी को नहीं…बताना” 

मैंने मजाक करते हुए कहा, “मैं तो बताऊंगा।” 

वो मेरे पास मारने के लिए आई, और मैने उसको गले लगा लिया। हम दोनों एक दूसरे के बाहों में थे, “ये सब बातें किसी को नहीं बताते समझी।”

वो भी मुझे अपनी बाहों में का के दबोचा और बोली, “समझ गई।”

उसके बाद से ये हमारे बीच का रिश्ता शुरू हो गया, और हमने खूब मस्ती की जब भी कोई घर पर नहीं होता तो वो मुझे बुलाती और या जब भी मैं उदयपुर आता हम दोनों जरूर मिलते और एक साथ टाइम बिताते। 

अब घर में काजल के लिए रिश्ते आने लगे हैं, मैं चुप रहता हूँ। चाय के कप पर चाची कहती हैं। काजल मेरी तरफ देखती है और नजरें झुका लेती है। दोनों जानते हैं और एक दूसर को देख के स्माइल करते हैं। जो बात उस दोपहर शुरू हुई वो अभी भी घर के अंदर ही चल रही है। बाकी दुनिया को जानने की जरूरत नहीं।


Happy reading—and enjoy the dark.

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