मेरा नाम रोहित है। मैं 24 साल का हूँ और अभी-अभी MBA खत्म करके अपने भैया के घर आया हूँ। मेरे भैया, अमित, मुझसे 8 साल बड़े हैं। उनकी शादी को दो साल हो चुके हैं और वे दिल्ली में एक अपार्टमेंट में रहते हैं।
मैंने नौकरी के लिए दिल्ली आने का फैसला किया क्योंकि यहीं मेरे इंटरव्यू थे। भैया ने मुझे अपने घर रुकने के लिए कहा – “कम से कम तब तक रुक जब तक तुझे नौकरी न लग जाए।”
जब मैं पहली बार उनके घर पहुँचा, तो भैया ऑफिस से आने ही वाले थे। दरवाज़ा खोला तो मेरी भाभी ने – प्रिया।
मैंने प्रिया भाभी की तस्वीरें देखी थीं, लेकिन आँखों से देखना अलग था। वह 26 साल की थीं, मध्यम कद की, गोल-मटोल चेहरा, और वह सूट जो उनके शरीर पर बिल्कुल सही बैठा था। उनके बाल खुले थे, गीले शायद नहाकर आई थीं। उनकी सुंदरता ने मुझे पहली नज़र में ही हिला दिया।
“रोहित?” उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा। उनकी मुस्कान में कोमलता थी।
“हाँ भाभी,” मैंने नज़रें झुकाते हुए कहा, क्योंकि मेरी नज़रें अनजाने में उनके गले पर टिक गई थीं जहाँ से हल्की नमी दिख रही थी।
“आओ, आओ… बाहर क्यों खड़े हो?” उन्होंने दरवाज़ा पूरी तरह खोला और मुझे अंदर आने का इशारा किया।
जब मैं अंदर आया, तो मुझे उनकी खुशबू महसूस हुई – कोई महंगा परफ्यूम नहीं, बल्कि नहाने के बाद की ताज़गी और शायद उनकी त्वचा की अपनी खुशबू।
“भैया कहाँ हैं?” मैंने पूछा।
“ऑफिस से आ रहे हैं। आते ही होंगे। तुम बैठो, मैं चाय बनाती हूँ,” वह किचन की ओर गईं।
मैंने सोफे पर बैठते हुए उन्हें देखा। उनकी पीठ मेरी ओर थी। वह सूट पहने हुए थीं जो उनकी कमर से थोड़ा ऊपर तक आता था, और नीचे सलवार। जब वह झुककर चाय की पत्ती निकालने लगीं, तो उनकी कमर का वो हिस्सा दिखा जो कपड़ों से ढका था लेकिन आकार साफ़ बता रहा था – गोल, मुलायम, भरी हुई।
मैंने तुरंत नज़रें हटा लीं। यह गलत था। वह मेरी भाभी थीं, मेरे भैया की पत्नी।
लेकिन मन को कौन समझाए? 24 साल की उम्र में मैंने कुछ रिश्ते बनाए और तोड़े थे, लेकिन कोई भी लड़की मुझे उतना नहीं भाई जितना कि यह पहली मुलाकात में ही प्रिया भाभी ने मुझे अपनी ओर खींचा।
भैया आए और हम तीनों ने साथ में खाना खाया। प्रिया भाभी ने बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया था – शाही पनीर, दाल मखनी, और रोटियाँ।
“कैसा लगा खाना?” भैया ने पूछा।
“बहुत बढ़िया भैया,” मैंने कहा और प्रिया भाभी की ओर देखा। उन्होंने मुस्कुराते हुए धन्यवाद कहा।
रात को सोने का इंतज़ाम हुआ। यह एक 2BHK अपार्टमेंट था – एक बेडरूम भैया-भाभी का, और एक ड्रॉइंग रूम में सोफे को बेड में बदलना पड़ता था।
“रोहित, तुम बेडरूम में सो लो,” भैया ने कहा। “मैं और प्रिया सोफे पर सो लेंगे।”
“नहीं नहीं भैया, यह कैसे हो सकता है? मैं यहीं सोफे पर सो लूँगा,”
“अरे बेवकूफ़, तुम मेहमान हो। और वैसे भी, सोफे पर मेरी टाँगें टूट जाती हैं। तुम बेडरूम में सो,” भैया ने ज़बरदस्ती मुझे बेडरूम में धकेल दिया।
मैंने देखा कि प्रिया भाभी कुछ कहना चाहती थीं लेकिन रुक गईं। उनकी आँखों में कुछ अजीब सा था – शायद यह सोचकर कि एक अजनबी उनके बेडरूम में सोएगा, या शायद कुछ और।
अगले कुछ हफ्तों में मैं उनके घर पर ही रहने लगा। मेरे इंटरव्यू चल रहे थे और मैं दिन भर घर पर ही रहता था। भैया सुबह 9 बजे ऑफिस चले जाते और शाम 7-8 बजे तक लौटते।
प्रिया भाभी घर पर ही रहती थीं। वह एक गृहिणी थीं, हालाँकि उन्होंने B.Com किया हुआ था लेकिन शादी के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की।
धीरे-धीरे हमारी दोस्ती होने लगी। मैं सुबह उठकर उनके साथ नाश्ता करता, फिर वह अपने काम में लग जातीं और मैं अपनी तैयारी में।
एक दिन की बात है। मैं बाथरूम से नहाकर बाहर आ रहा था। मैंने केवल तौलिया लपेटा हुआ था। जैसे ही मैं बाहर निकला, प्रिया भाभी सामने खड़ी थीं। उनकी आँखें मेरे बिना शर्ट के शरीर पर टिक गईं।
मैंने जिम में काफी मेहनत की थी। मेरी छाती चौड़ी थी, बाइसेप्स उभरे हुए थे, और पेट की मांसपेशियाँ साफ़ दिखती थीं।
“ओह… सॉरी रोहित,” प्रिया भाभी ने तुरंत नज़रें हटाते हुए कहा, लेकिन मैंने देखा कि उनकी नज़रें फिर से मेरी ओर खिंचीं।
“कोई बात नहीं भाभी,” मैंने कहा और अपने कमरे में चला गया, लेकिन मेरे दिल में कुछ हिलोरें मारने लगीं। क्या भाभी को भी मैं पसंद आ रहा था?
उसके बाद से मैंने जानबूझकर अपने कपड़े कम पहनने शुरू कर दिए। घर पर मैं शर्टलेस रहता, केवल शॉर्ट्स पहनता। मैंने देखा कि प्रिया भाभी मुझे देखती हैं, फिर शर्माकर नज़रें हटा लेती हैं।
एक दिन मैंने उन्हें किचन में काम करते देखा। वह झुककर सब्ज़ी काट रही थीं। उनका सूट थोड़ा ऊपर उठ गया था और मुझे उनकी पीठ का हिस्सा दिख रहा था – गोरा, चिकना।
मैं चुपचाप वहाँ खड़ा रहा, उन्हें देखता रहा। जब वह सीधी हुईं, तो उन्होंने मुझे देखा। हमारी आँखें मिलीं। वह लाल हो गईं और तुरंत काम में लग गईं, लेकिन मैंने देखा कि उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
“क्या चाहिए था रोहित?” उन्होंने पूछा।
“पानी… पानी लेने आया था,” मैंने कहा और फ्रिज की ओर बढ़ा।
जब मैं पानी की बोतल निकाल रहा था, तो मेरी पीठ उनकी ओर थी। मुझे महसूस हुआ कि उनकी नज़रें मेरी पीठ पर हैं, फिर मेरी कमर पर, फिर शायद नीचे।
मैंने मुस्कुराते हुए पानी पिया और कमरे में चला गया। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। यह खेल अब दोतरफा हो चुका था।
एक शाम की बात है। भैया ऑफिस से आए और बोले कि उन्हें कल सुबह तक का एक अर्जेंट काम है। उन्हें रात भर ऑफिस में रहना होगा।
“प्रिया, मैं आज रात नहीं आ पाऊँगा। तुम दोनों ही खाना खा लेना,” भैया ने कहा।
“ठीक है,” प्रिया भाभी ने कहा, लेकिन मैंने देखा कि उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी, या शायद कुछ और।
रात को हम दोनों ने साथ में खाना खाया। भाभी ने शराब निकाली – “रोहित, थोड़ी पीओगे? मुझे भी नींद नहीं आती जब अमित नहीं होते।”
“ज़रूर भाभी,” मैंने कहा।
हमने दो-दो पैग लगाए। शराब के नशे में प्रिया भाभी थोड़ी खुलकर बोलने लगीं। उन्होंने बताया कि भैया अक्सर ऑफिस के काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें ध्यान नहीं दे पाते।
“मैं समझ सकता हूँ भाभी,” मैंने कहा और उनका हाथ सहलाया।
वह मेरे हाथ को देखती रहीं, लेकिन हटाया नहीं। हमारी आँखें मिलीं और इस बार हम दोनों ने नज़रें नहीं हटाईं।
“रोहित… तुम बहुत अच्छे हो,” उन्होंने धीरे से कहा।
“भाभी…” मैंने उनका हाथ पकड़ा।
“प्रिया… मुझे प्रिया कहो,” उन्होंने कहा।
“प्रिया…” मैंने उनका नाम लिया और उनके करीब आ गया।
वह खड़ी हो गईं। हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे। मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया।
“यह गलत है…” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, लेकिन उनकी आँखें कुछ और ही कह रही थीं।
“मैं जानता हूँ,” मैंने कहा और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वह पहले तो रूखी रहीं, फिर धीरे-धीरे पिघलने लगीं। उनके होंठ नरम थे, मीठे थे। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और गहरा किस किया।
जब हम अलग हुए, तो उनकी आँखें नम थीं। “यह नहीं होना चाहिए था रोहित…”
“मुझे माफ़ कर दो अगर गलत लगा हो तो,” मैंने कहा।
“नहीं… गलत नहीं लगा… बस…” वह रुक गईं।
मैं समझ गया था। उन्हें भी वही चाहिए था जो मुझे, लेकिन समाज का डर था, पति का डर था।
उस रात हम और कुछ नहीं कर पाए। लेकिन वह रात हमारे रिश्ते की नींव बन गई।
उसके बाद से हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता बन गया। भैया के सामने हम सामान्य रहते, लेकिन जैसे ही वह ऑफिस जाते, हम एक-दूसरे के करीब आ जाते।
एक दिन मैंने उन्हें किचन में पीछे से पकड़ लिया। वह सब्ज़ी काट रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़ी और उनकी गर्दन पर चूम लिया।
“रोहित… कोई आ जाएगा…” उन्होंने कहा, लेकिन विरोध नहीं किया।
“कोई नहीं है भाभी… भैया ऑफिस गए हैं,” मैंने कहा और उनकी गर्दन चूमते रहा।
मैंने उनका चेहरा पीछे से मोड़ा और उनके होंठ चूमे। वह पूरी तरह पिघल चुकी थीं। मेरे हाथ उनकी छाती पर थे, उनकी चूचियों को महसूस कर रहे थे।
“आह्ह्ह… रोहित…” उन्होंने कराहते हुए कहा।
मैंने उनकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। वह सब्ज़ी काटना भूल गईं और मेरे हाथों में समा गईं।
“कितनी सॉफ्ट हैं आपकी चूचियाँ भाभी,” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा।
“रोहित… प्लीज… रुको…” उन्होंने कहा, लेकिन मैं नहीं रुका।
मैंने उनका सूट ऊपर उठाया और अपने हाथ अंदर डाल दिए। उन्होंने ब्रा पहनी हुई थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया।
“ओह्ह्ह… रोहित… यह गलत है…” वह कराह रही थीं।
“क्या गलत है भाभी? बताओ ना…” मैंने कहा और उनके निप्पलों को उँगलियों से कसकर पकड़ा।
“आह्ह्ह…” वह सिसक उठीं।
मैंने उन्हें पलटा और किचन के काउंटर पर बैठा दिया। अब वह मेरी ओर थीं, मेरी बाहों में। मैंने उनके सूट के बटन खोलने शुरू किए।
“रोहित… नहीं… अगर कोई आ गया तो…” उन्होंने डरते हुए कहा।
“कोई नहीं आएगा भाभी… आज पूरा दिन हमारा है,” मैंने कहा और उनका सूट खोल दिया।
उन्होंने गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उनकी गोल चूचियों को बहुत सुंदर दिखा रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह… रोहित… ऐसे…” वह मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थीं।
मैंने एक चूची को ब्रा से बाहर निकाला और चूसने लगा। उनका निप्पल कड़क हो गया था। मैंने उसे दाँतों से काटा और वह मादक आवाज़ निकालने लगीं।
“ओह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… और करो…”
मैंने दूसरी चूची भी बाहर निकाली और बारी-बारी से दोनों को चूसा। उनके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे, मुझे अपनी ओर खींच रहे थे।
“रोहित… मैं पागल हो रही हूँ…” उन्होंने कहा।
“मैं भी भाभी… मैं भी…” मैंने कहा और उनके सलवार के नाड़े को खींचा।
तभी दरवाज़े की घंटी बजी।
हम दोनों चौंक गए। प्रिया भाभी ने तुरंत अपने कपड़े ठीक किए और बाल संवारे। मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए।
“शायद कुरियर होगा,” उन्होंने कहा और दरवाज़ा खोलने गईं।
मैं किचन में ही रुका, मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था और मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था।
कुछ दिनों तक हम ऐसे ही चोरी-छिपे मौके लेते रहे। कभी किचन में चूमा, कभी बाथरूम के बाहर एक-दूसरे को छुआ, कभी भैया के सोने के बाद लिविंग रूम में हाथ पकड़ा।
लेकिन मौका नहीं मिल रहा था पूरी तरह एक-दूसरे को पाने का।
फिर वो रात आई।
भैया को फिर से ऑफिस का काम था। उन्हें रात भर रुकना था। शाम को ही उन्होंने फोन करके बता दिया।
प्रिया भाभी ने मुझे यह खबर दी। हम दोनों की आँखों में एक अजीब सी चमक थी – उत्साह, डर, और बेकरारी।
“आज रात…” मैंने कहा और रुक गया।
“हाँ,” उन्होंने सिर झुकाते हुए कहा। “लेकिन रोहित… मुझे डर लग रहा है।”
“किस बात का डर भाभी?”
“अगर… अगर कल को पता चल गया… अगर हम गलती से…”
“मैं सावधान रहूँगा भाभी। कोई नहीं जानेगा। यह हमारे बीच का राज़ रहेगा,” मैंने उनका चेहरा उठाया और उनकी आँखों में देखा।
“वादा करो… किसी को नहीं बताओगे,” उन्होंने कहा।
“वादा करता हूँ,” मैंने कहा और उनके होंठों पर चूमा।
रात के 11 बजे थे। हम दोनों ने शराब पी थी। प्रिया भाभी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उन पर बहुत सुंदर लग रही थी। उनका ब्लाउज थोड़ा गहरा था और उनकी गोरी छाती का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था।
हम लिविंग रूम में बैठे थे। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। इस बार कोई जल्दी नहीं थी, कोई डर नहीं था कि कोई आ जाएगा।
“भाभी… आज मैं आपको पूरी तरह अपना बनाना चाहता हूँ,” मैंने उनके कान में कहा।
वह कांप गईं। “रोहित… मैंने कभी… मतलब… अमित के अलावा किसी और के साथ…”
“मैं जानता हूँ भाभी। मैं आपको दर्द नहीं दूँगा। बस विश्वास करो मुझ पर,” मैंने कहा।
मैंने उन्हें उठाया और अपने कमरे में ले गया। वहाँ मेरा बिस्तर तैयार था। मैंने लाइटें बंद करके केवल एक नाइट लैंप जलाया।
अब वह कमरे में मेरे सामने खड़ी थीं। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। वह धीरे-धीरे खुलने लगी। फिर मैंने उनकी साड़ी के नाड़े को खोला और साड़ी नीचे गिर गई।
वह अब केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उनका ब्लाउज खोला। उनकी गोल, मुलायम चूचियाँ ब्रा में कैद थीं। मैंने ब्रा के हुक खोले और उसे भी उतार दिया।
उनकी चूचियाँ मेरे सामने थीं – गोल, सफ़ेद, निप्पल गुलाबी और कड़क। मैंने उन्हें हाथों में लिया और मसलना शुरू कर दिया।
“कितनी सुंदर हैं आपकी चूचियाँ भाभी,” मैंने कहा।
“रोहित… शर्मा रही हूँ…” उन्होंने कहा।
“क्यों शर्माना? आप खूबसूरत हैं,” मैंने कहा और एक चूची को मुँह में ले लिया।
“आह्ह्ह…” वह सिसक उठीं।
मैंने चूसना शुरू किया। एक चूची को चूसता, दूसरी को हाथ से दबाता। वह अपने हाथ मेरे बालों में फँसा चुकी थीं और मुझे अपनी ओर दबा रही थीं।
“रोहित… बहुत मज़ा आ रहा है…”
मैंने नीचे झुककर उनका पेटीकोट भी खोल दिया। वह अब केवल पैंटी में थीं – सफ़ेद रंग की, लेस वाली। मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को महसूस किया। वह पहले से ही गीली हो चुकी थी।
“भाभी… आप तो पहले से ही तैयार हैं,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
“रोहित… चुप करो…” उन्होंने शर्माते हुए कहा।
मैंने उनकी पैंटी नीचे सरकाई। उनकी चूत सामने थी – थोड़ी घनी झाँटें थीं, गुलाबी दरार, और चमकदार रस से भीगी हुई।
“कितनी खूबसूरत चूत है आपकी भाभी,” मैंने कहा।
“रोहित… प्लीज… अब और मत तड़पाओ…” वह बेकरार हो रही थीं।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनकी टाँगें खोल दीं। फिर मैं नीचे झुका और उनकी चूत पर अपनी जीभ रख दी।
“ओह्ह्ह… रोहित…” वह चीख उठीं।
मैंने चाटना शुरू किया। नीचे से ऊपर, फिर ऊपर से नीचे। उनकी चूत का स्वाद अमृत जैसा था – थोड़ा नमकीन, थोड़ा मीठा, और बहुत उत्तेजित करने वाला।
मैंने उनकी clitoris को ढूंढा और उसे जीभ से चूसना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह… वहाँ… वहीं… रोहित… और तेज़…” वह पागल हो रही थीं।
मैंने एक उँगली उनकी चूत में डाल दी। वह आसानी से अंदर चली गई। फिर दूसरी उँगली। अब मैं दो उँगलियों से उनकी चूत चोद रहा था और clitoris चूस रहा था।
“रोहित… मैं झड़ने वाली हूँ… ओह्ह्ह… आह्ह्ह…” वह चीख रही थीं।
और फिर वह झड़ गईं। उनकी चूत से पानी निकला और मैंने सब चाट लिया। वह बिस्तर पर तड़प रही थीं, आँखें बंद किए, और मुझे अपनी चूत पर दबाए हुए।
जब वह सामान्य हुईं, तो मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था – लगभग 7 इंच लंबा, मोटा, और टोपा लाल हो चुका था।
प्रिया भाभी ने मेरा लंड देखा और उनकी आँखें बड़ी हो गईं। “रोहित… यह तो… बहुत बड़ा है…”
“क्या आप ले पाएंगी भाभी?” मैंने पूछा।
“कोशिश करूँगी… लेकिन धीरे से… प्लीज…” उन्होंने कहा।
मैंने उनकी टाँगें खोलीं और उनके ऊपर आ गया। मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत के छेद पर रखा।
“तैयार हैं भाभी?”
“हाँ… लेकिन धीरे… धीरे डालना…”
मैंने धीरे से एक धक्का दिया। उनकी चूत बहुत टाइट थी।
“ओह्ह्ह… रोहित… बड़ा है… रुको…” वह दर्द से कराहीं।
मैंने रुककर उनके होंठ चूमे। “शांत हो जाओ भाभी… थोड़ी देर में मज़ा आएगा।”
थोड़ी देर बाद जब वह शांत हुईं, तो मैंने फिर से धक्का दिया। इस बार थोड़ा और अंदर गया।
“आह्ह्ह…” वह सिसकीं।
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। अब मेरा लंड उनकी चूत की सबसे गहरी जगह तक पहुँच चुका था।
“कैसा लग रहा है भाभी?”
“बहुत… बहुत अच्छा… अब चोदो रोहित… मुझे चोदो…” वह बेकरार हो रही थीं।
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे। उनकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी, मुझे अंदर की ओर खींच रही थी।
“और तेज़ रोहित… और तेज़…” वह कह रही थीं।
मैंने गति बढ़ा दी। अब मैं पूरी ताकत से उन्हें चोद रहा था। बिस्तर की चरमराहट, हमारी साँसों की आवाज़, और फच-फच की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
“भाभी… आपकी चूत बहुत मस्त है…” मैंने कहा।
“तुम्हारा लंड भी… ओह्ह्ह… आह्ह्ह… और ज़ोर से…”
मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख दीं और और गहराई से चोदना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड उनकी चूत की सबसे अंदर की दीवारों को छू रहा था।
“रोहित… मर गई… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…”
“साथ में भाभी… मैं भी झड़ने वाला हूँ…”
“अंदर ही छोड़ना… प्लीज… अंदर ही…”
मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। पांच-छह बार और फिर मैं झड़ गया। मेरा गाढ़ा, गर्म पानी उनकी चूत में भर गया और वह भी उसी वक्त झड़ गईं।
मैं उनके ऊपर गिर गया। हम दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं, हमारे शरीर पसीने में नहाए हुए थे।
“रोहित…” उन्होंने धीरे से कहा।
“हाँ भाभी?”
“यह… यह बहुत अच्छा था,” उन्होंने कहा और मेरे होंठों पर चूमा।
उस रात हमने कई बार सेक्स किया। हर बार अलग अंदाज़ में।
एक बार प्रिया भाभी ने मुझे अपनी गांड चाटने को कहा। वह डॉगी स्टाइल में हो गईं और मैंने उनकी गोल, सफ़ेद गांड को चाटना शुरू कर दिया। उनका गांड का छेद टाइट था, मैंने जीभ से उसे चाटा और थोड़ा अंदर डाला।
“ओह्ह्ह… रोहित… यह भी… बहुत अच्छा लग रहा है…” वह कराह रही थीं।
मैंने उनकी गांड चाटते हुए उनकी चूत में उँगली कर दी। अब दोहरी उत्तेजना से वह पागल हो रही थीं।
फिर मैंने उनकी गांड मारने की कोशिश की। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उनकी गांड के छेद पर रखा।
“धीरे रोहित… मेरी गांड बहुत टाइट है…” उन्होंने कहा।
मैंने धीरे से एक धक्का दिया। उनकी गांड बहुत टाइट थी, मेरा आधा लंड ही अंदर गया और वह दर्द से चीख उठीं।
“रुको… रुको… बहुत दर्द हो रहा है…”
मैंने रुककर उनकी पीठ चूमी। थोड़ी देर बाद जब वह शांत हुईं, तो मैंने फिर से धक्का दिया। इस बार पूरा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… रोहित… बड़ा है…”
मैंने धीरे-धीरे उनकी गांड मारनी शुरू की। पहले धीरे, फिर तेज़। उनकी गांड बहुत टाइट थी, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“कैसा लग रहा है भाभी? गांड मरवाने में?”
“बहुत… बहुत अच्छा… और तेज़ करो…”
मैंने पूरी ताकत से उनकी गांड मारी। मेरे धक्कों से उनकी गांड लाल हो गई थी। फिर मैंने अपना पानी उनकी गांड में ही छोड़ दिया।
सुबह जब मेरी आँख खुली, तो प्रिया भाभी मेरी बाहों में थीं। उनका सिर मेरी छाती पर था, एक हाथ मेरे लंड पर।
मैंने उन्हें जगाया। “भाभी… सुबह हो गई है।”
उन्होंने आँखें खोलीं और मुझे देखा। पहले वह भूली-भटकी सी दिखीं, फिर उन्हें याद आया। उनके चेहरे पर एक शर्मिंदगी की मुस्कान आई।
“रोहित… हमने…”
“हाँ भाभी… हमने किया… और यह बहुत अच्छा था,” मैंने कहा।
“लेकिन अगर अमित को पता चल गया तो?”
“पता नहीं चलेगा भाभी। यह हमारे बीच का राज़ रहेगा,” मैंने उनके होंठों पर चूमा।
भैया सुबह 9 बजे आए। हम दोनों सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मुझे पता था कि अब हमारे बीच सब कुछ बदल चुका है।

